पुरः पुरः प्रगच्छ रे प्रगाय मातृवन्दनम्।
स्वजन्मभूमि रक्षणे प्रयच्छ वीर जीवनम्॥
शिरः कुरु समुन्नतम् तवास्तु मा क्वचिद् भयम्।
पुरः पुरः प्रगच्छ रे प्रगाय मातृवन्दनम्।
रणे धृतिः सुकौशलम् प्रवर्धताम् मनोबलम्।
सुनिश्चितः जयस्तव कुरु स्वधर्मपालनम्॥
पुरः पुरः प्रगच्छ रे प्रगाय मातृवन्दनम्।
आगे आगे बढते चलो मातृवन्दना गाता चलो।
जन्मभूमि कि रक्षाण मे जीवदान कर्ता चलो।
सिर ऊँचा कर्ता चलो निर्भय से बढता चलो।
आगे आगे बढते चलो मातृवन्दना गाता चलो।
युद्ध में धैर्य और कौशल से मनोबल बढाते रहो।
तुम्हारे विजय सुनिश्चित है अपने धर्म का पालान करो।
आगे आगे बढते चलो मातृवन्दना गाता चलो।